Lakshmi Puja – Diwali 2019 | लक्ष्मी पूजा – दिवाली 2019

Lakshmi Puja – Diwali 2019 | लक्ष्मी पूजा – दिवाली 2019

दिवाली या कहें दीपावली भारतवर्ष में मनाया जाने वाला हिंदूओं का एक ऐसा पर्व है जिसके बारे में लगभग सब जानते हैं।

अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई। अंधेरा मिट गया उजाला हो गया यानि कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा।

इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है।

एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है।

दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाये जाते हैं।

वर्तमान में तो इस त्यौहार ने धार्मिक भेदभाव को भी भुला दिया है और सभी धर्मों के लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाने लगे हैं।

हालांकि पूरी दुनिया में दिवाली से मिलते जुलते त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाये जाते हैं लेकिन भारतवर्ष में विशेषकर हिंदूओं में दिवाली का त्यौहार बहुत मायने रखता है।

Lakshmi Puja – Diwali 2019 | लक्ष्मी पूजा – दिवाली 2019

माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। घर में सुख-समृद्धि बने रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें |

इसके लिये दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के उपरांत सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।

लग्न व मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिये।

7 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:57 से 19:53

प्रदोष काल- 17:27 से 20:06

वृषभ काल- 17:57 से 19:53

अमावस्या तिथि आरंभ- 22:27 (06 नवंबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 21:31 (07 नवंबर)

 

  1. November 7
  2. Lakshmi Puja Muhurat – 17:57 to 19:53
  3. Pradosh Kaal – 17:27 to 20:06
  4. Taurus Era- 17:57 to 19:53
  5. New moon day beginning – 22:27 (06 November)
  6. New moon date – 21:31 (07 November)

दिवाली, या दीपावली भारत के कई हिस्सों में एक आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश है और यह पांच दिनों तक मनाये जाने वाले हिन्दू पर्व का हिस्सा है जिसे ‘दीपों का उत्सव’ कहते हैं।

वर्ष के लिए चन्द्रमा के चक्रों के आधार पर, दीवाली का पर्व पश्चिमी पंचांग में अक्टूबर और नवंबर के मध्य समय में मनाया जाता है।

दीपों का उत्सव, दिवाली, एक रंगीन और खुशियों भरा त्योहार है।

इस विशेष त्योहार के लिए लोग अपने घरों और खुद को तैयार करते हैं, जो आध्यात्मिक अच्छाई की विजय और आध्यात्मिक अंधकार के हार का प्रतीक है।

बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए पटाखे जलाये जाते हैं, तेल के दीप जलाये जाते हैं |

फूलों की मालाएं बनाई जाती हैं, घरों के अंदर पानी के बर्तनों में मोमबत्तियां जलाई जाती है और उत्सव के उपलक्ष्य में मिठाइयां बांटी जाती हैं।

दिवाली बोध और ज्ञान के प्रकाश से अज्ञानता को दूर करने पर व्यक्ति के अंदर उत्पन्न होने वाले आंतरिक प्रकाश की ज्योति को दर्शाता है।

भारत के कई क्षेत्रों में, दिवाली के पांच दिन का उत्सव निम्नलिखित तरीके से मनाया जाता है:

 

  •  1 – धनतेरस – यह ज्यादातर भारतीय व्यवसायों के लिए वित्तीय वर्ष का प्रारम्भ होता है और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का भी दिन है।
  • 2 – नरक चतुर्दशी – यह सफाई का दिन है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और विभिन्न व्यंजन तैयार किये जाते हैं।
  •  3 – दिवाली –  यह अमावस्या होता है और दिवाली अवकाश का औपचारिक दिन है।
  •  4 – कार्तिक शुद्ध पद्यमी – इस दिन राजा बलि नरक से बाहर आये थे और धरती पर शासन किया था।
  •  5 – यम द्वितीय (या भाई दूज) भाइयों और बहनों के बीच के प्रेम को दर्शाता है।

ये दिन उत्तर भारत के कई स्थानों पर मनाये जाते हैं, दिवाली राजा राम के अयोध्या वापस लौटने और उनके राज्याभिषेक की खुशी में मनाई जाती है।

गुजरात में, इस दिन लक्ष्मी की पूजा की जाती है, और बंगाल में दिवाली को माता काली से जोड़ा जाता है।

स्थानों के बीच विविधताओं के बावजूद, इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है नवीनीकरण और अंधकार को दूर करना, और यह प्रकाश का खुशियों भरा त्योहार है।

 

Lakshmi Puja – Diwali 2019 | लक्ष्मी पूजा – दिवाली 2019

Deepawali is a public holiday in many parts of India and it is a part of the Hindu festival celebrated which is called ‘Festival of Deep’.

On the basis of the moon’s chakras for the year, the festival of Diwali is celebrated in the western almanac during the middle of October and November.

The festival of lights, Diwali, is a colorful and happy festival.

For this special festival, people prepare their homes and themselves, which symbolizes the defeat of spiritual goodness and the defeat of spiritual darkness.

To remove the evil forces, fireworks are lit, oil lamps are lit.

Floral beads are made, candles are burnt in water pots inside the houses and desserts are distributed in the celebration of the festival.

Diwali reflects the light of inner light which arises within the person when the ignorance is overcome by understanding and the light of knowledge.

In many areas of India, the festival of Diwali is celebrated in the following manner:

 

  • Day 1 – Dhanteras – This is the beginning of the financial year for most Indian businesses and also the day of worship of the goddess Lakshmi of wealth.
  • Day 2 – Hell Chaturdashi – This is the day of cleanliness. People wear new clothes and various dishes are prepared.
  • And Day 3 – Diwali – This is a new moon day and a formal day of Diwali holiday.
  • Day 4 – Kartik Pure Padhyami – On this day King Bali came out of hell and ruled the earth.
  • Day 5 – Yama II (or brother duo) reflects the love between brothers and sisters.

Lakshmi Puja – Diwali 2019 | लक्ष्मी पूजा – दिवाली 2019

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