dengue fever symptoms in hindi – डेंगू के बुखार के लक्षण

dengue fever symptoms in hindi  – डेंगू के बुखार के लक्षण

चार से सात दिनों के इन्क्यूबेशन पीरियड (incubation period) की अपेक्षा करें: एक बार डेंगू फ़ैलाने वाले मच्छर के काटने के पश्चात् इसके लक्षणों की शुरुआत के लिए औसतन चार से सात दिन लगते हैं।

यद्यपि औसतन इन्क्यूबेशन पीरियड चार से सात दिन का होता है, आप इसके लक्षण मच्छर काटने के कम से कम तीन दिनों के भीतर या अधिक से अधिक दो सप्ताह के बाद तक अनुभव कर सकते हैं।

अपना तापमान जांचें: तेज़ बुखार आना डेंगू का प्रमुख लक्षण है। डेंगू से होनेवाला बुखार बहुत तेज़ होता है जो कि 102°F से 105°F तक होता है ।

यह तेज़ बुखार दो से सात दिनों तक रहता है, फिर तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम हो जाता है, और बुखार पलट भी सकता है।

आपको फिर से तेज़ बुखार हो सकता है जो और अधिक दिनों तक बना रहता है।

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फ्लू जैसे लक्षणों को देखें: dengue fever symptoms in hindi 

बुखार आने के पश्चात् शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे स्वरुप का होता है।

बुखार आने के बाद दिखने वाले सामान्य लक्षणों में ललाट में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तीव्र दर्द, मतली और उल्टियाँ, थकान और त्वचा पर चकत्ते इत्यादि का समावेश होता हैं।

जोड़ों और मांसपेशियों में अत्याधिक दर्द होने के कारण डेंगू के बुखार को पहले “अस्थिभंजक ज्वर” भी कहा जाता था।

असामान्य रक्तस्त्राव पर नज़र रखें: रक्तसंचारप्रकरण में बदलाव या ऐसे बदलाव जिनसे शरीर में रक्त के प्रवाह पर असर पड़े, इस वायरस के अन्य मुख्य लक्षणों में से एक हैं।

रक्त के प्रवाह में बदलाव के उदाहरण में डेंगू के बुखार के साथ नाक और मसूढ़ों से रक्त आना शामिल हैं।
रक्त प्रवाह में बदलाव के अतिरिक्त लक्षणों में आँखों के पास लालिमा और गले में जलन और सुजन भी शामिल है।

त्वचा पर के लाल चकत्तों की जाँच करें: बुखार होने के तीन से चार दिन बाद त्वचा पर लाल चकत्ते दिखने शुरू होते हैं, जो एक से दो दिन में ठीक हो जाते हैं परन्तु फिर वापस आ सकते हैं।

ये लाल चकत्ते शुरुआत में अक्सर चेहरे पर उभरते हैं जो कि चेहरे की लाली की तरह दीखते हैं या फिर धब्बेदार लालिमा की तरह दीखते हैं जिनमे बिलकुल भी खुजली नहीं होती है।

दुसरे चरण में यह चकत्ते धड़ पर उभरते हुए चेहरे, भुजाओं तथा पैरों तक फ़ैल जाते हैं। दुसरे चरण के चकत्ते दो से तीन दिन तक रहते हैं।

कुछ मामलों में, ये चकत्ते छोटे बिंदु की तरह होते हैं जिन्हें पेटिकिये (petechiae) कहते हैं जो कि बुखार जाने के बाद शरीर के किसी भी भाग पर उभरते हैं।

दुसरे प्रकार के उभरने वाले चकत्ते खुजली वाले होते हैं जो हथेली और पैर के तलवों पर होते हैं।

डेंगू बुखार का रोगनिदान कैसे करें – dengue fever symptoms in hindi 

1. अपने डाक्टर से मिलें: यदि आप डेंगू के बुखार से मिलते जुलते लक्षण देखें तो आप इसके रोगनिदान के लिए जल्द से जल्द अपने डाक्टर से मिलें।

ऐसे ब्लड टेस्ट उपलब्ध हैं जिनसे आपके डाक्टर को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आप डेंगू के बुखार से पीड़ित हैं।

आपके डाक्टर रक्त की जाँच कर के आपके रक्त में मौजूद डेंगू के बुखार संबंधित एंटीबॉडीज का पता लगाएंगे। ब्लड टेस्ट की पूरी जाँच-पड़ताल में कुछ हफ्ते भी लग सकते हैं।

रोगनिदान प्रक्रिया को परखने के लिए प्लेटलेट्स की संख्या में बदलाव को जांचा जा सकता है। डेंगू बुखार से पीड़ित व्यक्तियों में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से कम पायी जाती है।

इसके अलावा रोगनिदान प्रक्रिया के साथ एक अतिरिक्त टेस्ट भी किया जाता है जिसे टुनीकेट टेस्ट (tourniquet test) कहते है।

इस टेस्ट से रक्तकेशिकाओं की अवस्था के बारे में जानकारी मिलती है। यह टेस्ट निर्णायक नहीं है परन्तु रोगनिदान प्रक्रिया में इससे मदद मिलती है।

डेंगू-बुखार के रोगनिदान से संबंधित नए टेस्ट पर अनुसन्धान अभी जारी है जिनमे POCT (point-of-care tests) भी शामिल है।

POCT (point-of-care tests) टेस्ट अस्पताल में किये जाते हैं जो कि संक्रमण की जल्द पुष्टि करते हैं।

डाक्टर आपके लक्षणों द्वारा ये पता लगा सकते हैं कि आप डेंगू के बुखार से संक्रमित हैं तथा संबंधित सहयोगी उपचार द्वारा आपकी तबियत में सुधार पर निगरानी रखी जायेगी।

2. डेंगू के बुखार के भौगोलिक परिसीमा (geographical limitations) के बारे में विचार करें: यद्यपि डेंगू का बुखार एक विश्वव्यापी समस्या है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में यह संक्रमण ज्यादा प्रबल है, जबकि कुछ जगहों पर यह बिलकुल नहीं हुआ है।

विश्व के क्षेत्र जहाँ आपको डेंगू के बुखार फ़ैलाने वाले मच्छर काटने की ज्यादा सम्भावना है वो उष्णकटिबंधीय क्षेत्र जैसे कि प्यरटो रिको, लैटिन अमेरिका, मक्सिको, होंडुरस, दक्षिणी पूर्वी एशिया और पैसिफिक द्वीप, इत्यादि हैं।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने ऐसे और भी दुसरे क्षेत्रों को पहचाना है जहाँ डेंगू के बुखार के मामले ज्यादा दर्ज हुए हैं, इनमें अफ्रीका के कुछ हिस्से, दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी भूमध्यसागरीय देश और पश्चिमी पैसिफिक के कुछ द्वीपों का समावेश है।

हाल ही में डेंगू बुखार के कुछ मामले यूरोप, फ्रांस, क्रोएशिया, पुर्तगाल के मैडिएरा द्वीप, चीन, सिंगापुर, कोस्टा रिका और जापान में भी दर्ज हुए हैं।

3. भारत के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों का ध्यान रखें: भारत में हर वर्ष डेंगू के कई मामले दर्ज होते हैं, और हर वर्ष ये आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। डेंगू के बुखार से मरीजों की मृत्यु के मामले भी हर वर्ष बढ़ते नज़र आ रहे हैं।

 वर्ष 2012 में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक में डेंगू बुखार के कई मामले दर्ज हुए थे।

हाल ही में भारत की राजधानी दिल्ली डेंगू के बुखार के चपेट में आई है। म्युनिसिपल कारपोरेशन के अनुसार दिल्ली में 5 सितम्बर 2015 तक 1259 डेंगू के बुखार के मामले दर्ज हुए हैं और ये आंकड़ा एक सप्ताह के भीतर ही 1872 तक पहुँच गया है।

हालांकि दिल्ली में वर्ष 2010 में इसी समयकाल में डेंगू के बुखार के 1933 मामले दर्ज हुए थे।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार डेंगू के बुखार से प्रभावित क्षेत्रों में दक्षिणी भारत के कुछ क्षेत्र और पूर्वी भारत के तटीय क्षेत्र जैसे उड़ीसा मुख्य रूप से शामिल हैं।

अपने हाल ही के सफ़र के बारे में विचार करें: यदि आपको लगता है कि आपको डेंगू का बुखार हुआ है तो पिछले दो हफ़्तों में किये गए दौरे के बारे में विचार करें, या अपने रहने के क्षेत्र पर विचार करें।

यदि आप डेंगू के बुखार के संभावित लक्षण देख रहें हैं आपने भारत के ऐसे क्षेत्रों में भ्रमण किया हो जहाँ डेंगू के बुखार से संबंधित मच्छर ज्यादा हों।

ऐसे मच्छरों को पहचानें: डेंगू के बुखार फ़ैलाने वाले मच्छरों पर विशिष्ट चिन्ह अंकित होते हैं।

“एडीज इजिप्ती” प्रजाति का मच्छर छोटा और गहरे रंग का होता है और इसके पैरों पर काली धारियाँ होती हैं। इसके शरीर पर सफ़ेद या चांदी जैसी चमकीली डिजाईन भी होती है जो संगीत वाद्य वीणा की आकृति जैसी लगती है।

ऐसा भी हो सकता है कि आपको याद आ जाए कि इस तरह के मच्छर ने आपको काटा है। यदि आपको काटे हुए मच्छर का प्रकार याद आ जाये तो यह जानकारी आपके इलाज़ में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

डेंगू के बुखार का उपचार इस तरह करें – dengue fever symptoms in hindi 

1. जल्द से जल्द मेडिकल उपचार की व्यवस्था करें: वैसे तो डेंगू के बुखार का कोई विशेष उपचार नहीं है, फिर भी संक्रमण के कारण रक्तस्त्राव की समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है जिसमें चिकित्सीय देखभाल की जरुरत होती है।

बहुत से लोग चिकित्सीय देखभाल से दो सप्ताह में ही अच्छा महसूस करने लगते हैं।

2. रिकमंडेड उपचार का अनुसरण करें: डेंगू के उपचार का सबसे अच्छा और सामान्य उपाय है शरीर को भरपूर आराम देना।

  • अधिक से अधिक आराम करें।
  • अधिक से अधिक तरल पीयें, और बुखार को नियंत्रित करने के लिए दवा लें।

डेंगू के बुखार के कारण हो रही पीड़ा और बेचैनी को दूर करने के लिए असिटामिनोफेन लेने की सलाह दी जाती है।

3. एस्पिरिन संबंधित दवा न लें: डेंगू के बुखार में रक्तस्त्राव होने के डर से दर्द के उपचार में एस्पिरिन संबंधित दवा नहीं लेनी चाहिए।

अपने डाक्टर से ओवर-द-काउंटर सूजनविरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) दवा लेने के बारे में पूछें: आइबूप्रोफेन और नेप्रोक्सेन जैसी दवाएं बुखार कम करने और तकलीफ दूर करने में मदद करती हैं।

कुछ मामलों में, आइबूप्रोफेन और नेप्रोक्सेन जैसी दवा लेना ठीक नहीं होगा यदि पहले ही डाक्टर की पर्ची द्वारा आपको ऐसी दवा निर्धारित की गयी हो या ऐसे घटकों से आपको गैस्ट्रोइंटेसटाइनल ब्लीडिंग होने की संभावना हो सकती है।

दवा के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। इसे निर्धारित की गयी मात्रा से अधिक न लें।
आप यदि दर्द की कोई दवा ले रहें हैं, या रक्त को पतला करने वाले घटक ले रहें हैं, तो कोई भी ओवर-द-काउंटर दवा लेने से पहले अपने डाक्टर से बात करें।

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4. पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए कुछ हफ्ते लग सकते हैं: अधिकतर लोग डेंगू के बुखार में दो हफ़्तों में स्वस्थ हो जाते हैं।
अधिकतर लोग, खासकर वयस्क, डेंगू के बुखार होने के पश्चात कई हफ़्तों या महिनों तक थकान और उदासी महसूस करते हैं।

5. आपातकालीन चिकत्सीय उपचार लें: यदि डेंगू के बुखार के लक्षण बने रहें या रक्तस्त्राव जैसी स्थिति बने तो तुरंत अपने डाक्टर से मिलें या आपातकालीन चिकित्सीय उपचार करें।

कुछ गौर करने लायक लक्षण जो यह चेतावनी देते हैं कि आपका शरीर रक्त-वाहिकाओं की अखंडता को बनाये रखने में सक्षम नहीं हैं उन्हें नीचे दिया गया है।

  • लगातार मतली और उल्टियाँ होना।
  • उल्टी में से खून आना।
  • मूत्र में रक्त आना।
  • पेट में दर्द होना।
  • सांस लेने में परेशानी होना।
  • नाक से खून बहना या मसूढ़ों से खून आना।
  • किसी काम के बाद जल्द थकान महसूस करना।

आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में भर्ती होना अति आवश्यक है: एक बार अस्पताल में भर्ती होने पर डेंगू के बुखार के लक्षणों से संबंधित संगत उपचार जान बचाने में सहायक होता हैं।

सबंधित देखभाल में तरल और एल्क्ट्रोलाईट प्रदान किया जाता है और आघात लगने से बचाव या उपचार किया जाता है।

6. चिकत्सीय उपचार ज़ारी रखें: अपने डाक्टर से सदा संपर्क में रहें और डेंगू के बुखार के पश्चात् स्वास्थ्य में सुधार होने की प्रक्रिया के दौरान किसी भी बदलाव या लक्षणों के दोहराने या बिगड़ने की जानकारी डाक्टर को दें।

आपके डाक्टर को ये पता होगा कि इस स्थिति को डेंगू हेमरिज़ फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम में बिगड़ने से कैसे रोकना है।

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