Causes and Treatment of Waist Pain (Back Pain)

Causes and Treatment of Waist Pain

कमरदर्द महिलाओं की एक आम समस्या है, अनियमित माहवारी, माहवारी में रक्तस्राव की कमी या अधिकता कमरदर्द का एक प्रमुख कारण है |

रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के बाद भी महिलाओं में कमरदर्द की शिकायत पाई जाती है. स्त्री रोग, श्‍वेत प्रदर, रक्त प्रदर, कमर की हड्डियों के कमज़ोर होने से भी महिलाओं को कमरदर्द होता है |

स्त्रियों को कमरदर्द चाहे किसी भी कारण से हो, इससे उनकी शारीरिक क्षमता और कामकाज प्रभावित होता है |

इस दर्द के कारण स्त्री की मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है. वह दर्द के मारे बेहाल होकर चिड़च़िड़ी हो जाती है |

बात-बात पर गुस्सा करना, चिल्लाना और झुंझलाहट तो जैसे उसकी फ़ितरत ही बन जाती है |

Causes and Treatment of Waist Pain


Causes and Treatment of Waist Pain

खसखस और कालीमिर्च दोनों को समान मात्रा में लेकर बारीक़ पीसकर इसका चूर्ण बनाकर रख लें |

10 ग्राम चूर्ण का सुबह-शाम गर्म दूध के साथ नियमित सेवन करें | इससे निश्‍चित ही कमरदर्द से राहत मिलती है.

150 ग्राम सरसों का तेल और 35 ग्राम देशी कपूर दोनों को मिलाकर शीशी में भरकर धूप में रख दें |

जब कपूर पिघल जाए, तो इससे कमर पर हल्के हाथों से मालिश करें. ऐसा नियमित कुछ दिनों तक करने से कमरदर्द से छुटकारा मिल जाता है |

5 ग्राम की मात्रा में हल्दी के चूर्ण को फांककर ऊपर से मीठा दूध पीएं. इसका नियमित सुबह-शाम सेवन करें.

कमरदर्द में नीम की पत्तियों के काढ़े से सेंक करने से लाभ होता है. नीम की कोमल पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा (पानी में ख़ूब औंटाने से काढ़ा तैयार होता है) बना लें |

इसके बाद रूई या साफ़ कपड़े को उक्त हल्के गरम का़ढ़े में भिगोकर दर्दवाले स्थान पर सेंक करें |

बादाम के तेल से हर रोज़ कमर पर मालिश करें और सुबह बादाम की 5 गिरी (रात को पानी में भिगोकर सुबह छील लें) पीसकर दूध के साथ सेवन करते रहने से कमरदर्द दूर हो जाता है.

5 खजूर को उबालकर उसमें 2 ग्राम मेथी का चूर्ण डालकर नियमित पीने से कमरदर्द मिटता है |

कमल ककड़ी के चूर्ण को दूध में उबालकर पीने से प्रदर दूर होता है और कमरदर्द से राहत मिलती है |

कमरदर्द कितना ही पीड़ादायक हो, इसके सेवन से अवश्य लाभ होता है |

Causes and Treatment of Waist Pain

अदरक का रस निकालकर उसे नारियल के तेल में मिलाकर गर्म करें. फिर उसे छानकर गुनगुना रहते हुए धीरे-धीरे मालिश करें, इससे महिलाओं को कमरदर्द से तुरंत राहत मिलेगी |

धतूरे के हरे पत्तों को लेकर उसका 40 ग्राम रस निकालें. इसमें 3 ग्राम सेंधा नमक और थोड़ी-सी अफीम मिलाकर गर्म करें |

फिर इसे उतारकर इससे कमर पर मालिश करें. 3-4 दिन तक ऐसा करने से कमरदर्द पूरी तरह ठीक हो जाता है |

छुहारों की गुठली निकालकर उनमें शुद्ध गुग्गुल का चूर्ण बनाकर भर दें. फिर उनके ऊपर आटे का मोटा लेप लगाकर तेज़ आंच पर सेंके |

जब वे जलने लगें, तो उन्हें आंच पर से उतार लें और ठंडा होने पर आटे को हटाकर छुहारे को गुग्गुल सहित पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें |

एक-एक गोली का सुबह-शाम मीठे गुनगुने दूध के साथ सेवन करें |

कमर दर्द के महत्वपूर्ण कारण – Causes and Treatment of Waist Pain

 Treatment of Waist Pain

Causes and Treatment of Waist Pain

 

श्वेतप्रदर होना: 

 प्रायः ज्यादातर महिलाओं को श्वेतप्रदर और रक्तप्रदर का रोग होता है, श्वेतप्रदर के भी अनेकों कारण हैं, रहन–सहन और खान –पान और सामाजिक वातावरण का दुष्प्रभाव इंसान पर इस तरह पड़ता है कि वो उसके शरीर को दीमक की तरह खत्म कर देता है।

जब तक श्वेतप्रदर की बीमारी रहती है कमर दर्द खत्म नहीं होता और जीवनभर रहता है।

रक्तप्रदर होना:


इसी तरह रक्तप्रदर से भी महिलाएं परेशान रहती हैं, मासिक स्राव में अनियमितता आने से महीने भर रक्त आता रहता है, और ये बहुत अधिक दुर्गध लिए होता है, इसके कारन कमर दर्द इतना होता है कि रोगी का उठना–बैठना मुश्किल हो जाता है।

घर–ग्रहस्थी के कार्यों में उचित सन्तुलन ना होने और गलत मुद्रा में बैठने से भी कमी दर्द हो जाता है। अधिक देर बैथे रहने की आदत बना लेना भी एक बड़ा कारण है।

एलोपथी दवाओं का दुष्प्रभाव:


इन दोनों कारणों के अलावा पीठ दर्द दवाओं का दुष्प्रभाव भी होता है, आज जैसे–जैसे विज्ञान विकसित होता जा रहा है, वैसे ही ये मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

चाहे नई–नई ऐलोपैथी की दवाओं का विकास हो रहा है लेकिन आजकल डॉक्टर जल्दी आराम पहुँचाने के चक्कर में ये दवाएं कई शारीरिक विकार को पैदा कर देती हैं।

दवाओं के कारण हो रही एलर्जी, रक्त की कमी या एनीमिया, कैंसर आदि आम तौर पर देखने को मिलते हैं।

कई बार एलोपैथी की दवाओं के बुरे प्रभाव के कारण तो हमारे गुर्दे तक भी ख़राब हो जाते हैं।

कई बार अंधेपन की बीमारी भी हो जाती है। बहुत सी दवाओं का असर मरीज के शरीर पर गम्भीर प्रभाव छोड़ता है।

सिजेरियन डिलीवरी: 


गर्भावस्था में आपरेशन के दौरान(सिजेरियन) बेहोश करने के लिए पीठ के पीछे हड्डियों में इंजेकशन लगाया जाता है, इससे 40% महिलाओं में पीठ का या कमर का दर्द विकसित हो जाता है।

बेहोश करने की इस विधि को स्पाइनल  अनस्थिप्सिया या एवीड्यूरल  एनस्थीसिया कहा जाता है।

वैसे तो डॉक्टर्स इस बात को मानते भी हैं कि  ये सही है लेकिन उन्हें कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा क्योंकि इसके लिए उन्हें डिलीवरी के वक़्त पुरे शरीर को सुन्न करना होगा।

एक तो डिलीवरी के वक़्त महिला वैसे भी बहुत मुश्किल दौर से गुजर रही होती है और फिर उसकी पीठ अपर इंजेक्शन लगाकर बेहोश करना जिस कारण उसकी मांसपेशियां बहुत कमजोर पड़ जाती हैं और तन्तुओं के टूटने का डर रहता है और फिर कमर या पीठ दर्द शुरू होता है।

और मरीज़ हमेशा के लिए इस दर्द से परेशां रहता है। ये भी निश्चित नहीं है कि  आपरेशन के बाद कितने वक़्त तक ये दर्द ठीक होगा।

इसलिए स्पाइनल एनस्थीसिया सिर्फ योग्य और अनुभवी डॉक्टर से ही दिलाया जाये इस बात का खास ध्यान रखा जाये।

ठंड लगना: Causes and Treatment of Waist Pain

कई बार अधिक ठंड होने या लगने की स्थिति में भी कमर दर्द शुरू हो जाता है।

कमर में चोट लगना:

कुछ महिलाओं की कमर पर किसी कारणवश चोट लग जाती है और आगे चलकर यही चोट भयंकर कमरदर्द का रूप ले लेती है।

मोटापा:

जब कोई महिला बहुत अधिक वजन वाली होती हैं तो उनकी कमर पर भी चर्बी की मात्रा बढ़ जाती है, इस कारण कमर दर्द होने लगता है।

कमरदर्द से छुटकारे के लिए क्या करें:

कमर दर्द या पीठ दर्द के रोगियों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिये:

इसके मरीज को साईकिल और दो पहियों वाले वहां चलना बन्द कर देना चाहिए।
बहुत ज्यादा भरी वजन उठाने से हमेशा बचना चाहिए।

उड़द दाल और दही का सेवन ना करें।

Causes and Treatment of Waist Pain


इस बिमारी से बचने के लिए सोने के लिए गद्देदार बिछोने का त्याग करे, सख्त और कड़े बिस्तर का उयोग करें।

खाने में खट्टे, अचार, लालमिर्च, निम्बू और गर्म मसाले का प्रयोग बिकुल ना करें, यही परहेज न हो सके तो कम मात्र में ले।

रोगी को हल्का–फुल्का व्यायाम करते रहना चाहिए।

सीधा बैठें

ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहें।

गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है। कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए,

इसी तरह बैठने का पोजीशन भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट को बिलकुल टाईट कर लें।

टहलने की आदत डालें


अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर एक 40  मिनट में अपनी चेयर से उठकर थोड़ी देर चल लें।

इसके अलावा नर्म गद्दे या आरामदायक बिस्तर से परहेज करना चाहिए। कमर के दर्द वाले रोगियों को  कडक बिस्तर पर ही सोना चाहिए।

एक्‍सरसाइज – Causes and Treatment of Waist Pain

कमर दर्द के लिए एक्‍सरसाइज भी करनी चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित एक्‍सरसाइज हैं। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

तैराकी वजन कम करने के साथ-साथ कमर के लिए भी बहुत फायदेमंद है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए।

ध्‍यान से झुकें

कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

मालिश करें


इन सब के अलावा कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें। साथ ही नमक मिले गरम पानी में एक कपड़ा डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं।

दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक गजब का तरीका है। रोज सुबह  नारियल के तेल में लहसुन की 3 से 4  कलियं डालकर गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।

योग – Causes and Treatment of Waist Pain

कमर दर्द को दूर करने के लिए योग बहुत फायदेमंद होता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

वैसे हर बीमारी का इलाज़ होता है, कमर दर्द का भी है। होमियोपैथी, आयुर्वेदिक और एलोपैथी सबमे इसका इलाज़ सम्भव है |

लेकिन किसी भी दवा का सेवन करने से पहले अनुभवी चिकित्सक से जरूर परामर्श लें, बिना परामर्श के ली गयी दवा आपको फायदे की जगह नुक्सान दे सकती है।

तो आप समझ ही गए होंगे कि  कमर दर्द  में सावधानी ही आपकी सुरक्षा करती है, आप अपना ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।

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